Sunday, August 17, 2008


ज़िन्दगी तुने लहू ले के दिया कुछ भी नही...

तेरे दामन में मेरे वास्ते क्या कुछ भी नही....

मेरे इन हाथो की चाहो तो तलाशी ले लो...

मेरे हाथो में लकीरों के सिवा कुछ भी नही...

हमने देखा है कई ऐसे खुदाओं को यंहा.....

सामने जिनके ओ सचमुच का खुदा कुछ भी नही....

या खुदा अब के ये किस रंग से आई है बहार....

ज़र्द ही ज़र्द है पेरो पे, हरा कुछ भी नही....

दिल भी जिद पे अडा है , किसी बच्चे की तरह...

या तो सब कुछ ही इसे चाहिए , या कुछ भी नही....


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