गले लगा के जो सुनाते थे दिल के आँहों को...
तरस रहा हूँ, उन्ही की हसीन बांहों को....
कदम कदम पर ओ आँख बिछा बिछा देना...
जरुर याद तो होगा तुम्हारी राहो को...
दुहाई है तेरी ये रहज़न दुहाई है...
की लुट लिया आज रहबर ने राहों को ....
मिलना फ़िर तेरे दामन में दाग उनके....
शराब-ऐ-नब से धोया है जिन आँहों को....
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