क्या मिला है, क्या मिलेगा अश्क के व्यापार से
हर घड़ी जी लो मुहब्बत से,खुशी से,प्यार से
जीतने के सब तरीके सीख कर मैं जब लड़ा,
ज़िन्दगी ने इक सबक सिखला दिया है हार से
हम किताबे ज़िन्दगी के उस वरक को क्या पढ़े,
जो शुरू हो प्यार से औ' ख़त्म हो तकरार से
सरहदों से बाँट कर जब खाहिशों के दिन ढलें,
रात भर आवाज देता है कोई उस पार से
प्यार, खुशियाँ, दोस्ती अख़लाक़ ले आना ज़रा,
मोल दे कर गर खरीदे जा सके बाज़ार से
आपकी सोहबत ने हमको क्या हसीँ तोहफे दिए,
खाहिशें लाचार सी औ' खाब कुछ बेजार से
Saturday, May 7, 2011
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