Saturday, June 28, 2008

ज़रा पाने के चाहत में , बहुत कुछ छूट जाता है....
ना जाने सब्र का धागा , कंहा पर टूट जाता है....

किसे हमराह कहते हो यंहा पर अपना साया भी....
कंही पर साथ चलता है .... कही पर छूट जाता है..........

गनीमत है नगरवालो, लूटेरो से लुटे हो तुम,
हमें तो गाँव में अक्सर दरोगा लूट जाता है.....

अजब शै है ये रिश्ते भी बहुत मजबूत लगते है...
ज़रा से भूल से लेकिन भरोसा टूट जाता है.....

Wednesday, June 25, 2008

है अभी आए अभी कैसे चले जाएँगे लोग....
हमजैसे नादानों को क्या और कैसे समझाएँगे लोग......
है नई आवाज़ धुन भी है नई तुम ही कहो...
उन पुराने गीतों को फिर किसलिए गाएँगे लोग...
नम तो होंगी आँखें मेरे दुश्मनों की भी जरूर ....
जब -दिखावे को ही मातम करने आएँगे लोग.....
फेंकते हैं आज पत्थर जिस पे इक दिन देखना....
uska बुत चौराह पर खुद ही लगा जाएँगे लोग....
हादसों को यों हवा देते ही रहना है बजा....
देखकर धुआँ बुझाने आग को आएँगे लोग....
हमको कुछ कहना पड़ा है आज मजबूरी में यों....
डर था मेरी चुप से भी तो और घबराएँगे लोग.....
इतनी पैनी बातें मत कह अपनी ग़ज़लों में ऐ दोस्त....
हो के ज़ख्मी देखना बल साँप-से खाएँगे लोग....
कौन है अश्कों को सौदागर यहाँ पर दोस्तों....
देखकर तुमको दुखी, दिल अपना बहलाएँगे लोग.....
है बड़ी बेढब रिवायत इस नगर की .....
पहले देंगे ज़ख्म और फिर इनको सहलाएँगे लोग......
दूर तुमसे हम जा नहीं सकते....
शर्त ये भी है की तुम्हे पा नहीं सकते....
किसी को अपने आंसुओ का सबब....
लाख चाहे बता नहीं सकते....
जिस पे लिखी है इबारत कोई....
लाख चाहे ओ दीवार ढहा नहीं सकते.....
उसको रिश्तों से है नफरत शायद....
कोई रिश्ता हम चाहे भी तो बना नहीं सकते....
बातों बातों में जो ढली होगी वो रात कितनी मनचली होगी
तेरे सिरहाने याद भी मेरीरात भर शम्मां-सी जली होगी
जिससे निकला है आफ़ताब मेरावो तेरा घर तेरी गली होगी
दोस्तों को पता चला होगादुश्मनों-सी ही खलबली होगी
सबने तारीफ़ तेरी की होगीमैं चुप रहा तो ये कमी होगी
तेरी आँखो में झाँकने के बादलड़खड़ाऊँ तो मयक़शी होगी
है तेरा ज़िक्र तो यकीं है मुझेमेरे बारें में बात भी होगी
हार, किस काँधे पे धर दूँ
जीत किस को भेंट कर दूँ
कोई तो अपना नहीं था
एक तुम थे, अब नही हो!


किस तरह राहत बनेगी
टूट जाने की हताशा
थक गई साँसों को देगा
कौन जीवन की दिलासा
बिस्तरों पर सिलवटें अब
नींद क्या, बस करवटें अब
रात ने ताने दिए तो
आँख में बस बात ये की
कोई तो सपना नहीं था
एक तुम थे, अब नहीं हो!

किस हथेली की रेखाओं
का वरण मैंने किया है
किसका , क्षण भर प्यार पाने
को जनम मैंने लिया है
इस प्रश्न का हल मिला कला
हाँ वही रीता हुआ पल
जिसने मेरा गीत सादा
जो कहो, रत्ना या राधा
कोई तो इतना नहीं था
एक तुम थे, अब नहीं हो!