Monday, October 27, 2008

सूरज का सफ़र ख़त्म हुआ रात न आयी....
हिस्से में मेरे ख्वाबों की सौगत न आयी ....

मौसम ही पे हम करते रहे तब्सरा ता देर....
दिल जिस से दुखे ऐसी कोई बात न आयी ....

यूं डोरे को हम वक्त की पकड़े तो हुए थे....
एक बार मगर छूटी तो फिर हाथ न आयी ....

हमराह कोई और न आया तो क्या गिला....
परछाई भी जब मेरी मेरे साथ न आयी ....

हर सिम्त नज़र आती हैं बेफ़सल ज़मीन....
इस साल भी शहर में बरसात न आयी ....
हम पढ़ रहे थे ख़्वाब के पुर्ज़ों को जोड़ के
आँधी ने ये तिलिस्म भी रख डाला तोड़ के....

आग़ाज़ क्यों किया था सफ़र उन ख़्वाबों का
पछता रहे हो सब्ज़ ज़मीनों को छोड़ के....

इक बूँद ज़हर के लिये फैला रहे हो हाथ
देखो कभी ख़ुद अपने बदन को निचोड़ के....

कुछ भी नहीं जो ख़्वाब की तरह दिखाई दे
कोई नहीं जो हम को जगाये झिन्झोड़ के....

इन पानियों से कोई सलामत नहीं गया
है वक़्त अब भी कश्तियाँ ले जाओ मोड़ के....

Friday, October 24, 2008

हमारे शौक़ की ये इन्तिहा थी ...
कदम रखा कि मंज़िल रास्ता थी ....

कभी जो ख़्वाब था वो पा लिया है....
मगर जो खो गई वो चीज़ क्या थी....

मोहब्बत मर गई मुझको भी ग़म है ...
मेरे अच्छे दिनों की आशना थी ....

जिसे छू लूँ मैं वो हो जाये सोना ....
तुझे देखा तो जाना बद्दुआ थी....

मरीज़े-ख़्वाब को तो अब शफ़ा है ...
मगर दुनिया बड़ी कड़वी दवा थी....

Sunday, October 12, 2008

ये अलग बात है साकी की मुझे होश नही...
होश इतना है की मैं तुझसे फरामोश नही...

मैं तेरी मस्त निगाहों का भरम रख लूंगा...
होश आया भी तो कह दूंगा मुझे होश नही....

याद इतना है की पंहुचा दर - ऐ-मैखाने तक...
क्या कहू आगे की आगे का मुझे होश नही.....

कभी उन मदभरी आँखों से पिया था इक जाम...
अज तक होश नही, होश नही, होश नही..........

Thursday, October 9, 2008

खुशी ने मुझको ठुकराया है, रंज ओ गम ने पाला है...
गुलों ने बेरुखी की है, काँटों ने सम्हाला है....

मुहब्बत में ख्याल -ऐ-साहिल-ओ - मंजिल है नादानी...
जो इन राहों में लुट जाए, ओ तक़दीरवाला हैं....

चरागाँ कर के दिल को बहला रहे हो जंहावालो...
अँधेरा लाख रोशन हो, उजाला फ़िर उजाला है...

किनारों से मुझे ये नाखुदा दूर ही रखना...
वंहा ले कर चलो, तूफ़ान जंहा से उठने वाला है....

नशेमन ही के लुट जाने का गम होता तो क्या गम था...
यंहा तो बेचने वालो ने गुलशन बेच डाला है.......

Sunday, October 5, 2008

तमन्नाओ के बहलावे में अक्सर आ ही जाते है...
कभी हम चोट खाते है कभी हम मुस्कुराते है....

हम अक्सर दोस्तों के बेवफाई सह तो लेते हैं....
मगर हम जानते है दिल हमारा टूट जाता हैं....

जब भी याद आती हैं तुम्हारे प्यार की बातें...
तब तब दिल हमारा दर्द से बेजार होता हैं....

किसी के साथ जब बीते हुए लम्हों की याद आई...
थकी आँखों में अश्को के सितारे झिलमिलाते हैं....