मिलते हो मुझसे बिछड़ जाते हो हर मुलाक़ात के बाद,
खोये रहते हैं सिर्फ तुम में ही हम हर मुलाक़ात के बाद।
मिलती है ख़ुशी तुमसे हमें उस हर मुलाक़ात के बाद,
दिल चाहता नहीं बिछड़ना कभी किसी मुलाक़ात के बाद।
वक्त ना आये कभी ऐसा की जुदा तुम हो जाओ हमसे,
हम नहीं जी पायेंगे फिर सनम तुमसे उस जुदाई के बाद।
दिल रोयेगा बहुत ये संभल नहीं पायेगा फिर कभी भी,
नहीं थमेगी इन अश्को की बरसात उस जुदाई के बाद।
इस दिल में बसे हो सिर्फ तुम ही नहीं कोई तुम्हारे सिवा,
मिटा देंगे खुद का नामोनिशां भी हम उस जुदाई के बाद।
दिल को रहती है आस यही हम मिले हर मुलाक़ात के बाद,
ना आये अब जुदाई की रात कभी किसी मुलाक़ात के बाद
Friday, June 26, 2009
Thursday, April 23, 2009
आज फ़िर टूट के बिखरा तो तुझे याद किया...
दिल मेरा दर्द में डूबा तो तुझे याद किया......
ख्वाब अश्को में ढल गए तेरी सूरत ले कर....
आज फ़िर गम ने सताया तो तुझे याद किया....
खुशियाँ बेसुमार है मेरे जीवन की तरह.....
आज फ़िर हिज्र में रोया तो तुझे याद किया....
ज़िन्दगी बीत गयी है गमो के साये में...
भूल कर भी कभी हंसा तो तुझे याद किया....
जब भी तेरी जुदाई के आजाब लम्हों ने .....
मुझ को बेताब किया तो तुझे याद किया.....
लाख दुरी सही लेकिन मेरी जाना जब भी....
दिल तेरे नाम पे धारका तो तुझे याद किया...
दिल मेरा दर्द में डूबा तो तुझे याद किया......
ख्वाब अश्को में ढल गए तेरी सूरत ले कर....
आज फ़िर गम ने सताया तो तुझे याद किया....
खुशियाँ बेसुमार है मेरे जीवन की तरह.....
आज फ़िर हिज्र में रोया तो तुझे याद किया....
ज़िन्दगी बीत गयी है गमो के साये में...
भूल कर भी कभी हंसा तो तुझे याद किया....
जब भी तेरी जुदाई के आजाब लम्हों ने .....
मुझ को बेताब किया तो तुझे याद किया.....
लाख दुरी सही लेकिन मेरी जाना जब भी....
दिल तेरे नाम पे धारका तो तुझे याद किया...
तुम मेरी आँख के तेवर न भुला पाओगे
अनकही बात को समझोगे तो याद आउंगा॥
हमने खुशियों की तरह दुःख भी इकट्ठे देखे...
शफा-ऐ-ज़ीस्त को पलटोगे तो याद आउंगा॥
इस अंदाज़ से होती थी मुखातिब मुझसे....
ख़त किसी और को लिखोगे तो याद आउंगा॥
सर्द रातो के महकते हुए सन्नाटों में....
जब किसी फूल को चूमोगे तो याद आउंगा॥
अब तेरे अश्क मैं होठो से चुरा लेता हूँ...
हाँथ से ख़ुद इन्हे पोंछोगे तो याद आउंगा॥
शाल पहनाऐगा अब कौन दिसम्बर में तुम्हे...
बारिशों में जब कभी भिंगो के तो याद आउंगा॥
आज तुम महफ़िल-ऐ-यारां पे हो मगरूर बहुत....
जब कभी टूट के बिखरोगे तो याद आउंगा॥
हादसे आयेंगे जीवन तो तुम हो के निढाल...
किसी दीवार को थामोगे तो याद आउंगा........
अनकही बात को समझोगे तो याद आउंगा॥
हमने खुशियों की तरह दुःख भी इकट्ठे देखे...
शफा-ऐ-ज़ीस्त को पलटोगे तो याद आउंगा॥
इस अंदाज़ से होती थी मुखातिब मुझसे....
ख़त किसी और को लिखोगे तो याद आउंगा॥
सर्द रातो के महकते हुए सन्नाटों में....
जब किसी फूल को चूमोगे तो याद आउंगा॥
अब तेरे अश्क मैं होठो से चुरा लेता हूँ...
हाँथ से ख़ुद इन्हे पोंछोगे तो याद आउंगा॥
शाल पहनाऐगा अब कौन दिसम्बर में तुम्हे...
बारिशों में जब कभी भिंगो के तो याद आउंगा॥
आज तुम महफ़िल-ऐ-यारां पे हो मगरूर बहुत....
जब कभी टूट के बिखरोगे तो याद आउंगा॥
हादसे आयेंगे जीवन तो तुम हो के निढाल...
किसी दीवार को थामोगे तो याद आउंगा........
Saturday, April 11, 2009
किसी आँखों मे मोहब्बत का सितारा होगा
एक दिन आएगा कि कोई शक्स हमारा होगा,
कोई जहाँ मेरे लिए मोती भरी सीपियाँ चुनता होगा
किसी और दुनिया का किनारा होगा,
काम मुश्किल है मगर जीत ही लूगाँ किसी दिल को
मेरे खुदा का अगर ज़रा भी सहारा होगा,
किसी के होने पर मेरी साँसे चलेगीं
कोई तो होगा जिसके बिना ना मेरा गुज़ारा होगा,
देखो ये अचानक ऊजाला हो चला,
दिल कहता है कि शायद किसी ने धीमे से मेरा नाम पुकारा होगा,
और यहाँ देखो पानी मे चलता एक अन्जान साया,
शायद किसी ने दूसरे किनारे पर अपना पैर उतारा होगा,
कौन रो रहा है रात के सन्नाटे में,
मेरे जैसा तन्हाई का कोई मारा होगा,
अब तो बस उसी किसी एक का इन्तज़ार है,
किसी और का ख्याल ना दिल को ग़वारा होगा,
एक दिन आएगा कि कोई शक्स हमारा होगा,
कोई जहाँ मेरे लिए मोती भरी सीपियाँ चुनता होगा
किसी और दुनिया का किनारा होगा,
काम मुश्किल है मगर जीत ही लूगाँ किसी दिल को
मेरे खुदा का अगर ज़रा भी सहारा होगा,
किसी के होने पर मेरी साँसे चलेगीं
कोई तो होगा जिसके बिना ना मेरा गुज़ारा होगा,
देखो ये अचानक ऊजाला हो चला,
दिल कहता है कि शायद किसी ने धीमे से मेरा नाम पुकारा होगा,
और यहाँ देखो पानी मे चलता एक अन्जान साया,
शायद किसी ने दूसरे किनारे पर अपना पैर उतारा होगा,
कौन रो रहा है रात के सन्नाटे में,
मेरे जैसा तन्हाई का कोई मारा होगा,
अब तो बस उसी किसी एक का इन्तज़ार है,
किसी और का ख्याल ना दिल को ग़वारा होगा,
Sunday, March 15, 2009
अगर रख सको तो एक निशानी हूँ मैं....
खो दो तो सिर्फ एक कहानी हूँ मैं....
रोक पाए न जिसको ये सारी दुनिया....
वोह एक बूँद आँख का पानी हूँ मैं.....
सबको प्यार देने की आदत है हमें....
अपनी अलग पहचान बनाने की आदत है हमे....
कितना भी गहरा जख्म दे कोई....
उतना ही ज्यादा मुस्कराने की आदत है हमें...
इस अजनबी दुनिया में अकेला ख्वाब हूँ मैं....
सवालो से खफा छोटा सा जवाब हूँ मैं....
जो समझ न सके मुझे, उनके लिए "कौन"....
जो समझ गए उनके लिए खुली किताब हूँ मैं....
आँख से देखोगे तो खुश पाओगे......
दिल से पूछोगे तो दर्द का सैलाब हूँ मैं....
"अगर रख सको तो निशानी.....
खो दो तो सिर्फ एक कहानी हूँ मैं ........
Regards........
खो दो तो सिर्फ एक कहानी हूँ मैं....
रोक पाए न जिसको ये सारी दुनिया....
वोह एक बूँद आँख का पानी हूँ मैं.....
सबको प्यार देने की आदत है हमें....
अपनी अलग पहचान बनाने की आदत है हमे....
कितना भी गहरा जख्म दे कोई....
उतना ही ज्यादा मुस्कराने की आदत है हमें...
इस अजनबी दुनिया में अकेला ख्वाब हूँ मैं....
सवालो से खफा छोटा सा जवाब हूँ मैं....
जो समझ न सके मुझे, उनके लिए "कौन"....
जो समझ गए उनके लिए खुली किताब हूँ मैं....
आँख से देखोगे तो खुश पाओगे......
दिल से पूछोगे तो दर्द का सैलाब हूँ मैं....
"अगर रख सको तो निशानी.....
खो दो तो सिर्फ एक कहानी हूँ मैं ........
Regards........
अगर रख सको तो एक निशानी हूँ मैं....
खो दो तो सिर्फ एक कहानी हूँ मैं....
रोक पाए न जिसको ये सारी दुनिया....
वोह एक बूँद आँख का पानी हूँ मैं.....
सबको प्यार देने की आदत है हमें....
अपनी अलग पहचान बनाने की आदत है हमे....
कितना भी गहरा जख्म दे कोई....
उतना ही ज्यादा मुस्कराने की आदत है हमें...
इस अजनबी दुनिया में अकेला ख्वाब हूँ मैं....
सवालो से खफा छोटा सा जवाब हूँ मैं....
जो समझ न सके मुझे, उनके लिए "कौन"....
जो समझ गए उनके लिए खुली किताब हूँ मैं....
आँख से देखोगे तो खुश पाओगे......
दिल से पूछोगे तो दर्द का सैलाब हूँ मैं....
"अगर रख सको तो निशानी.....
खो दो तो सिर्फ एक कहानी हूँ मैं ........
Regards........
खो दो तो सिर्फ एक कहानी हूँ मैं....
रोक पाए न जिसको ये सारी दुनिया....
वोह एक बूँद आँख का पानी हूँ मैं.....
सबको प्यार देने की आदत है हमें....
अपनी अलग पहचान बनाने की आदत है हमे....
कितना भी गहरा जख्म दे कोई....
उतना ही ज्यादा मुस्कराने की आदत है हमें...
इस अजनबी दुनिया में अकेला ख्वाब हूँ मैं....
सवालो से खफा छोटा सा जवाब हूँ मैं....
जो समझ न सके मुझे, उनके लिए "कौन"....
जो समझ गए उनके लिए खुली किताब हूँ मैं....
आँख से देखोगे तो खुश पाओगे......
दिल से पूछोगे तो दर्द का सैलाब हूँ मैं....
"अगर रख सको तो निशानी.....
खो दो तो सिर्फ एक कहानी हूँ मैं ........
Regards........
Friday, February 27, 2009
नहीं मिलना तो भला याद भी आते क्यों हो...
इस कमी का मुझे अहसास दिलाते क्यों हो...
डरतुम्हें इतना भी क्या है कहो ज़माने का ...
रेत पर लिख के मेरा नाम मिटाते क्यों हो...
दिल में चाहत है तो काँटों पे चला आएगा...
आप पलकों को गलीचे-सा बिछाते क्यों हो....
हम इतने किए उपकार सदा ये माना....
हम को हर बार मगर आप गिनाते क्यों हो....
जाने किस वक्त तुम्हें इनकी ज़रूरत होगी....
आप बेवक्त ही अश्कों को गिराते क्यों हो....
यारी पिंजरे से ही कर ली है जब परिंदे ने...
आश्मान उसको खुला आप दिखाते क्यों हो...
जिंदगी फूस का इक ढेर है इसमें आकर...
आग तुम इश्क की सरकार लगाते क्यों हो....
मुझको मालूम है दुश्मन नहीं हो दोस्त मेरे....
मुझसे खंजर को बिना बात छिपाते क्यों हो...
इश्क मरता नहीं यारों ये हकीकत जानो....
किसी मीरा को ज़हर आप पिलाते क्यों हो....
इस कमी का मुझे अहसास दिलाते क्यों हो...
डरतुम्हें इतना भी क्या है कहो ज़माने का ...
रेत पर लिख के मेरा नाम मिटाते क्यों हो...
दिल में चाहत है तो काँटों पे चला आएगा...
आप पलकों को गलीचे-सा बिछाते क्यों हो....
हम इतने किए उपकार सदा ये माना....
हम को हर बार मगर आप गिनाते क्यों हो....
जाने किस वक्त तुम्हें इनकी ज़रूरत होगी....
आप बेवक्त ही अश्कों को गिराते क्यों हो....
यारी पिंजरे से ही कर ली है जब परिंदे ने...
आश्मान उसको खुला आप दिखाते क्यों हो...
जिंदगी फूस का इक ढेर है इसमें आकर...
आग तुम इश्क की सरकार लगाते क्यों हो....
मुझको मालूम है दुश्मन नहीं हो दोस्त मेरे....
मुझसे खंजर को बिना बात छिपाते क्यों हो...
इश्क मरता नहीं यारों ये हकीकत जानो....
किसी मीरा को ज़हर आप पिलाते क्यों हो....
कहने को तो हम, खुश अब भी हैं...
हम तुम्हारे तब भी थे, हम तुम्हारे अब भी हैं....
रूठने-मनाने के इस खेल में, हार गए हैं हम....
हम तो रूठे तब ही थे, आप तो रूठे अब भी हैं....
मेरी ख़ता बस इतनी है, तुम्हारा साथ चाहता हूँ...
तब तो पास होके दूर थे, और दूरियाँ अब भी हैं...
मुझसे रूठ के दूर हो, पर एहसास तो करो...
प्यासे हम तब भी थे, प्यासे हम अब भी हैं....
इस इंतज़ार में मेरा क्या होगा, तुम फिक्र मत करना .....
सुकून से हम तब भी थे, सुकून से हम अब भी हैं.......
बस थोड़ा रूठने के अंजाम से डरते हैं....
डरते हम तब भी थे, डरते हम अब भी हैं.......
हमारी तमन्ना कुछ ज़्यादा नहीं थी, जो पूरी न होती....
कम में गुज़ारा तब भी था, कम में गुज़ारते अब भी हैं....
चलते हैं तीर दिल पे कितने, जब तुम रूठ जाते हो....
ज़ख्मी हम तब भी थे, ज़ख्मी हम अब भी हैं....
मेरी मासूमियत को तुम, ख़ता समझ बैठे हो...
मासूम हम तब भी थे, मासूम हम अब भी हैं....
आप हमसे रूठा न करें, बस यही इल्तिजा है....
फरियादी हम तब भी थे, फ़रियादी हम अब भी हैं.....
तुम हो किस हाल में, कम से कम ये तो बता दो....
बेखबर हम तब भी थे, बेखब़र हम अब भी हैं
हम तुम्हारे तब भी थे, हम तुम्हारे अब भी हैं....
रूठने-मनाने के इस खेल में, हार गए हैं हम....
हम तो रूठे तब ही थे, आप तो रूठे अब भी हैं....
मेरी ख़ता बस इतनी है, तुम्हारा साथ चाहता हूँ...
तब तो पास होके दूर थे, और दूरियाँ अब भी हैं...
मुझसे रूठ के दूर हो, पर एहसास तो करो...
प्यासे हम तब भी थे, प्यासे हम अब भी हैं....
इस इंतज़ार में मेरा क्या होगा, तुम फिक्र मत करना .....
सुकून से हम तब भी थे, सुकून से हम अब भी हैं.......
बस थोड़ा रूठने के अंजाम से डरते हैं....
डरते हम तब भी थे, डरते हम अब भी हैं.......
हमारी तमन्ना कुछ ज़्यादा नहीं थी, जो पूरी न होती....
कम में गुज़ारा तब भी था, कम में गुज़ारते अब भी हैं....
चलते हैं तीर दिल पे कितने, जब तुम रूठ जाते हो....
ज़ख्मी हम तब भी थे, ज़ख्मी हम अब भी हैं....
मेरी मासूमियत को तुम, ख़ता समझ बैठे हो...
मासूम हम तब भी थे, मासूम हम अब भी हैं....
आप हमसे रूठा न करें, बस यही इल्तिजा है....
फरियादी हम तब भी थे, फ़रियादी हम अब भी हैं.....
तुम हो किस हाल में, कम से कम ये तो बता दो....
बेखबर हम तब भी थे, बेखब़र हम अब भी हैं
ज़िन्दगी और मौत में बस, फासला इतना रहे....
दरमियाँ दोनों के तेरे प्यार का परदा रहे............
सोचता हूँ रात दिन की चंद लम्हों के लिए....
तू रहे और मैं रंहू...ऐसी कोई दुनिया रहे....
सारी नेमत बेच कर के मांग लो तकदीर से ...
सुबह को मर जायें लेकिन रात भर जिन्दा रहें....
क्या करूँगा खुशी ले कर, पास रखो तुम इससे....
पर तुम्हारे गम में साथी, मेरा कुछ हिस्सा रहे....
साथ दे देता मुकद्दर और ऐसा हो सके......
जब किसी महफ़िल में जाऊँ, ओ वंहा आया रहे........
दरमियाँ दोनों के तेरे प्यार का परदा रहे............
सोचता हूँ रात दिन की चंद लम्हों के लिए....
तू रहे और मैं रंहू...ऐसी कोई दुनिया रहे....
सारी नेमत बेच कर के मांग लो तकदीर से ...
सुबह को मर जायें लेकिन रात भर जिन्दा रहें....
क्या करूँगा खुशी ले कर, पास रखो तुम इससे....
पर तुम्हारे गम में साथी, मेरा कुछ हिस्सा रहे....
साथ दे देता मुकद्दर और ऐसा हो सके......
जब किसी महफ़िल में जाऊँ, ओ वंहा आया रहे........
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