Thursday, April 23, 2009

तुम मेरी आँख के तेवर न भुला पाओगे
अनकही बात को समझोगे तो याद आउंगा॥

हमने खुशियों की तरह दुःख भी इकट्ठे देखे...
शफा-ऐ-ज़ीस्त को पलटोगे तो याद आउंगा॥

इस अंदाज़ से होती थी मुखातिब मुझसे....
ख़त किसी और को लिखोगे तो याद आउंगा॥

सर्द रातो के महकते हुए सन्नाटों में....
जब किसी फूल को चूमोगे तो याद आउंगा॥

अब तेरे अश्क मैं होठो से चुरा लेता हूँ...
हाँथ से ख़ुद इन्हे पोंछोगे तो याद आउंगा॥

शाल पहनाऐगा अब कौन दिसम्बर में तुम्हे...
बारिशों में जब कभी भिंगो के तो याद आउंगा॥

आज तुम महफ़िल-ऐ-यारां पे हो मगरूर बहुत....
जब कभी टूट के बिखरोगे तो याद आउंगा॥

हादसे आयेंगे जीवन तो तुम हो के निढाल...
किसी दीवार को थामोगे तो याद आउंगा........

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