Saturday, June 28, 2008

ज़रा पाने के चाहत में , बहुत कुछ छूट जाता है....
ना जाने सब्र का धागा , कंहा पर टूट जाता है....

किसे हमराह कहते हो यंहा पर अपना साया भी....
कंही पर साथ चलता है .... कही पर छूट जाता है..........

गनीमत है नगरवालो, लूटेरो से लुटे हो तुम,
हमें तो गाँव में अक्सर दरोगा लूट जाता है.....

अजब शै है ये रिश्ते भी बहुत मजबूत लगते है...
ज़रा से भूल से लेकिन भरोसा टूट जाता है.....

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