Friday, April 18, 2008
Tuesday, April 8, 2008
आईना मुझसे मेरी पहली सी सूरत मांगे.....
मेरे अपने मेरे होने की निशानी मांगे...
आईना मुझसे मेरी पहली सी सूरत मांगे.....
मैं भटकता ही रहा....दर्द के वीराने में....
वक़्त लिखता रहा...
चेहरे पे हर इक पल का हिसाब...
मेरी शोहरत मेरी दीवानगी की नज़र हुई ....
पी गयी मय की बोतल ... मेरे गीतों की किताब...
आज लौटा हूं तो हँसने की अदा भूल गया...
ये शहर भुला मुझे मैं भी इसे भूल गया....
मेरी अपने मेरे होने की निशानी मांगे...
आईना मुझसे मेरी पहली सी सूरत मांगे.....
मेरा फन फिर मुझे बाज़ार में ले आया है...
ये ओ जाँ है की जंहा माहरो वफ़ा बिकते है...
बाप बिकते है और लखत-ए-जिगर बिकते है...
कोख बिकती है दिल बिकते है सिर बिकते है...
इस बदलती दुनिया का खुदा कोई नहीं....
सस्ते दामो में हर रोज़ खुदा बिकते है....बिकते है...
मेरी अपने मेरे होने की निशानी मांगे...
आईना मुझसे मेरी पहली सी सूरत मांगे.....
मेरे अपने मेरे होने की निशानी मांगे...
आईना मुझसे मेरी पहली सी सूरत मांगे.....
मैं भटकता ही रहा....दर्द के वीराने में....
वक़्त लिखता रहा...
चेहरे पे हर इक पल का हिसाब...
मेरी शोहरत मेरी दीवानगी की नज़र हुई ....
पी गयी मय की बोतल ... मेरे गीतों की किताब...
आज लौटा हूं तो हँसने की अदा भूल गया...
ये शहर भुला मुझे मैं भी इसे भूल गया....
मेरी अपने मेरे होने की निशानी मांगे...
आईना मुझसे मेरी पहली सी सूरत मांगे.....
मेरा फन फिर मुझे बाज़ार में ले आया है...
ये ओ जाँ है की जंहा माहरो वफ़ा बिकते है...
बाप बिकते है और लखत-ए-जिगर बिकते है...
कोख बिकती है दिल बिकते है सिर बिकते है...
इस बदलती दुनिया का खुदा कोई नहीं....
सस्ते दामो में हर रोज़ खुदा बिकते है....बिकते है...
मेरी अपने मेरे होने की निशानी मांगे...
आईना मुझसे मेरी पहली सी सूरत मांगे.....
अजीब लड़का हूं खुद को जलना चाहता हूं...
खुद को कंही रख के भूल जाना चाहता हूं...
मेरे नसीब की खुशिया कब मिली मुझको...
बस एक बार उम्र भर के आंसू बहाना चाहता हूं....
ना जाने कितनी मुहब्बत है रंन्ज-ओ-गम से मुझे...
कोई भी दर्द हो दिल में छुपाना चाहता हूं...
बहा बहा के आंसू बिखर चूका हूं बहुत....
सिमट के अब जरा मुस्कुराना चाहता हूं....
जिसे एक उम्र दिल में छुपा के रखा है....
ओ राज अब सब को बताना चाहता हूं....
वोही है याद जो अछा कहा है लोगो ने...
बाकि सब भूल जाना चाहता हूं....
मुझे ज़माने ने पत्थर समझ लिया है मगर....
मैं एक लड़का हूं सबको बताना चाहता हूं....
मुझ से जो रूठ चुकी है ज़माने की खुशियाँ...
तो उन खुशियों से मैं भी रूठ जाना चाहता हूं......
खुद को कंही रख के भूल जाना चाहता हूं...
मेरे नसीब की खुशिया कब मिली मुझको...
बस एक बार उम्र भर के आंसू बहाना चाहता हूं....
ना जाने कितनी मुहब्बत है रंन्ज-ओ-गम से मुझे...
कोई भी दर्द हो दिल में छुपाना चाहता हूं...
बहा बहा के आंसू बिखर चूका हूं बहुत....
सिमट के अब जरा मुस्कुराना चाहता हूं....
जिसे एक उम्र दिल में छुपा के रखा है....
ओ राज अब सब को बताना चाहता हूं....
वोही है याद जो अछा कहा है लोगो ने...
बाकि सब भूल जाना चाहता हूं....
मुझे ज़माने ने पत्थर समझ लिया है मगर....
मैं एक लड़का हूं सबको बताना चाहता हूं....
मुझ से जो रूठ चुकी है ज़माने की खुशियाँ...
तो उन खुशियों से मैं भी रूठ जाना चाहता हूं......
Subscribe to:
Posts (Atom)