कुछ बीते लम्हे जब लौट के आते है....
गम के साये साथ में लाते है....
हम जितना भी चाहे आईने के सामने मुस्कुराना....
न जाने आंसू कंहा से आँखों में भर आते है....
अपने दुनिया को आज भी ख्वाबों से सजाते है....
आँखे खुलते ही ये सब भी टूट जाते है....
जानते है न सच होगा अब कोई सपना हमारा....
फ़िर भी आँखों में ओ सुनहरे सपने सजाते है....
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