Wednesday, December 3, 2008

कुछ बीते लम्हे जब लौट के आते है....
गम के साये साथ में लाते है....

हम जितना भी चाहे आईने के सामने मुस्कुराना....
न जाने आंसू कंहा से आँखों में भर आते है....

अपने दुनिया को आज भी ख्वाबों से सजाते है....
आँखे खुलते ही ये सब भी टूट जाते है....

जानते है न सच होगा अब कोई सपना हमारा....
फ़िर भी आँखों में ओ सुनहरे सपने सजाते है....

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