कल रात जाने क्या हुआ....
कुछ देर पहले नींद से....
कुछ अश्क मिलने आ गए....
कुछ ख्वाब भी टूटे हुए....
कुछ लोग भी रूठे हुए...
कुछ रास्ता भटकी हुई...
कुछ गर्द में लिपटी हुई ...
कुछ बेतरह फ़ैली हुई...
कुछ खोल में लिपटी हुई....
बे-रब्त सी सोचे कई...
भूली हुई बातें कई...
एक शख्स की यादें कई...
फ़िर देर तक जागा रहा....
सोच में गुम बैठा रहा....
ऊँगली से ठंढे फर्श पर...
एक नाम ही लिखता रहा....
कल रात भी ओ रात थी...
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मैं देर तक रोता रहा......
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कल रात जाने क्या हुआ.................................................
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