हमारे शौक़ की ये इन्तिहा थी ...
कदम रखा कि मंज़िल रास्ता थी ....
कभी जो ख़्वाब था वो पा लिया है....
मगर जो खो गई वो चीज़ क्या थी....
मोहब्बत मर गई मुझको भी ग़म है ...
मेरे अच्छे दिनों की आशना थी ....
जिसे छू लूँ मैं वो हो जाये सोना ....
तुझे देखा तो जाना बद्दुआ थी....
मरीज़े-ख़्वाब को तो अब शफ़ा है ...
मगर दुनिया बड़ी कड़वी दवा थी....
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1 comment:
कभी जो ख्वाब था वो पा लिया है,
मगर जो खो गई वो चीज़ क्या थी.
अच्छी अभिव्यक्ति है.
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