Thursday, October 9, 2008

खुशी ने मुझको ठुकराया है, रंज ओ गम ने पाला है...
गुलों ने बेरुखी की है, काँटों ने सम्हाला है....

मुहब्बत में ख्याल -ऐ-साहिल-ओ - मंजिल है नादानी...
जो इन राहों में लुट जाए, ओ तक़दीरवाला हैं....

चरागाँ कर के दिल को बहला रहे हो जंहावालो...
अँधेरा लाख रोशन हो, उजाला फ़िर उजाला है...

किनारों से मुझे ये नाखुदा दूर ही रखना...
वंहा ले कर चलो, तूफ़ान जंहा से उठने वाला है....

नशेमन ही के लुट जाने का गम होता तो क्या गम था...
यंहा तो बेचने वालो ने गुलशन बेच डाला है.......

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