Monday, September 29, 2008

आग पुरी कंहा बुझी है अभी...
नम आँखों में भी प्यास है अभी....

दोस्तों से चुका रहा हूँ हिसाब...
दुश्मनों से कंहा ठानी है अभी...

दोस्त कह कर मुझे न दे गली...
दिल पे अभी ज़ख्म-ऐ-दोस्ती है अभी....

काट दे ये भी ख़ुदपरस्ती में ...
और थोडी सी जो ज़िन्दगी है अभी....

जाने क्यूँ कुंद हो गया नस्तर...
ज़ख्म की धार तो ओही है अभी.....

No comments: