Thursday, September 25, 2008

मेरा दिल भी शौक से तोड़ो एक तजुर्बा और सही...
लाख खिलौने तोड़ चुके हो एक खिलौना और सही....

रात है गम आज बुझा दो जलता हुआ हर एक चिराग...
दिल में अँधेरा हो ही चुका है घर में अँधेरा और सही....

दम है निकलता एक आशिक का भीड़ है आ कर देख तो लो...
लाख तमाशे देखेंगे होंगे एक नज़ारा और सही....

खंजर ले कर सोचते क्या हो अब तो कत्ल भी कर डालो....
दाग है सौ दमन पे तुम्हारे , एक इजाफा और सही......

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