दिल अकेला है बहुत रेगिस्तान के फूल की तरह...
तुम ने भी छोड़ दिया है मुझे दुनिया की तरह....
छोड़ के न जाओ यूं अहद-ऐ-गुजिस्ता की तरह...
बन के उम्मीद रहो कल के वादे की तरह....
तुम हवा हो तो बीखेरो मुझे साहिल साहिल....
मौज-ऐ-मय हो तो बहा दो मुझे दरिया के तरह....
पास रहते हो तो आता है जुदाई का ख्याल...
तुम मेरे दिल में हो अंदेशा-ऐ-फर्दा की तरह....
बीच में कुछ तो राह-ओ-रस्म-ऐ-ताल्लुकात रखो...
अजनबी यूं नही मिलते है भरोशेमा की तरह....
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