Saturday, September 6, 2008

दिल अकेला है बहुत रेगिस्तान के फूल की तरह...
तुम ने भी छोड़ दिया है मुझे दुनिया की तरह....

छोड़ के न जाओ यूं अहद-ऐ-गुजिस्ता की तरह...
बन के उम्मीद रहो कल के वादे की तरह....

तुम हवा हो तो बीखेरो मुझे साहिल साहिल....
मौज-ऐ-मय हो तो बहा दो मुझे दरिया के तरह....

पास रहते हो तो आता है जुदाई का ख्याल...
तुम मेरे दिल में हो अंदेशा-ऐ-फर्दा की तरह....

बीच में कुछ तो राह-ओ-रस्म-ऐ-ताल्लुकात रखो...
अजनबी यूं नही मिलते है भरोशेमा की तरह....

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