इतना टुटा हूँ की छूने से बिखर जाउंगा.....
अब अगर और दुआ दोगे तो मर जाउंगा....
लेकर मेरा पता वक्त जाया न करो....
मैं तो बंजारा हूँ क्या जाने किधर जाउंगा....
इस तरफ़ धुंध है , जुगनू है, न चिराग कोई...
कौन पहचानेगा बस्ती में अगर जाउंगा...
जिंदगी मैं भी मुसाफिर हूँ तेरी कश्ती का...
तू जंहा मुझसे कहेगी मैं उतर जाउंगा.....
यंहा रह जायेंगी गुलदानों में बस यादो की नज़र...
मैं तो खुशबू हूँ फजाओं में बिखर जाउंगा.....
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