Wednesday, September 3, 2008

करीब मौत खड़ी है ज़रा ठहर जाओ....
कज़ा से आँख लड़ी है ज़रा ठहर जाओ....

थकी थकी से फजा बुझे बुझे तारे...
बड़ी उदास घड़ी है ज़रा ठहर जाओ...

नही उम्मीद की हम आज सहर देखेंगे...
ये रात हम पे खड़ी है ज़रा ठहर जाओ...

अभी न जाओ की तारो का दिल धड़कता है ...
तमाम रात पड़ी है ज़रा ठहर जाओ...

फ़िर इसके बाद कभी हम तुमको रोकेंगे...
लबो पे साँस रुकी है ज़रा ठहर जाओ....

दम-ऐ-फिराक में जी भर के तुम्हे देख तो लूँ...
ये फैसले की घड़ी है ज़रा ठहर जाओ.....

2 comments:

परमजीत सिहँ बाली said...

बहुत बेहतरीन गीत है।
थकी थकी से फजा बुझे बुझे तारे...
बड़ी उदास घड़ी है ज़रा ठहर जाओ...
अति सुन्दर!

Anwar Qureshi said...

बहुत खूब ...बहुत अच्छा लिखा है आप ने ...