Wednesday, August 20, 2008

ज़ख्म-ऐ-तन्हाई में खुशबु-ऐ-हिना किसकी थी,
साया दिवार पे मेरा था, सदा किसकी थी...........

उसकी रफ्तार से लिपटी रही मेरी आँखे,
उस ने मुड़ कर भी न देखा की वफ़ा किसकी थी...

वक्त के तरह दबे पाँव ये कौन आया है,
मैंने अँधेरा जिसे समझा , ओ कबा किसकी थी...

आंसू से ही सही भर गया दामन मेरा,
हाथ तो मैंने उठाये थे,दुआ किसकी थी..........

मेरे आहों की जबान कोई समझता कैसे,
जिंदगी इतनी दुखी मेरे सिवा किसकी थी......

आग से दोस्ती उसकी थी, जला घर मेरा,
दी गयी किसको सज़ा और खता किसकी थी......

1 comment:

Unknown said...

hi

can u tell me this one if u know

Sitro ke aage jaha aur bhi hai....

plz do reply in the orkut community named Galib Corner.
here is the lik to that.
http://www.orkut.com/Community.aspx?cmm=82488


thank you