दिल में अब यूँ तेरे भूले हुये ग़म आते हैं,
जैसे बिछड़े हुये काबे में सनम आते हैं....
इक इक कर के हुये जाते हैं तारे रौशन ,
मेरी मन्ज़िल की तरफ़ तेरे क़दम आते हैं...
रक़्स-ए-मय तेज़ करो, साज़ की लय तेज़ करो ,
सु -ए-मैख़ाना सफ़ीरान-ए-हरम आते हैं....
कुछ हमीं को नहीं एहसान उठाने का दिमाग,
वो तो जब आते हैं माइल-ब-करम आते हैं....
और कुछ देर न गुज़रे शब-ए-फ़ुर्क़त से कहो,
दिल भी कम दुखता है वो याद भी कम आते हैं ......
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1 comment:
बहुत बेहतरीन लिखा है।
दिल में अब यूँ तेरे भूले हुये ग़म आते हैं,
जैसे बिछड़े हुये काबे में सनम आते हैं....
जरुर पढें दिशाएं पर क्लिक करें ।
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