Tuesday, April 8, 2008

अजीब लड़का हूं खुद को जलना चाहता हूं...
खुद को कंही रख के भूल जाना चाहता हूं...

मेरे नसीब की खुशिया कब मिली मुझको...
बस एक बार उम्र भर के आंसू बहाना चाहता हूं....

ना जाने कितनी मुहब्बत है रंन्ज-ओ-गम से मुझे...
कोई भी दर्द हो दिल में छुपाना चाहता हूं...

बहा बहा के आंसू बिखर चूका हूं बहुत....
सिमट के अब जरा मुस्कुराना चाहता हूं....

जिसे एक उम्र दिल में छुपा के रखा है....
ओ राज अब सब को बताना चाहता हूं....

वोही है याद जो अछा कहा है लोगो ने...
बाकि सब भूल जाना चाहता हूं....

मुझे ज़माने ने पत्थर समझ लिया है मगर....
मैं एक लड़का हूं सबको बताना चाहता हूं....

मुझ से जो रूठ चुकी है ज़माने की खुशियाँ...
तो उन खुशियों से मैं भी रूठ जाना चाहता हूं......

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