Sunday, February 3, 2008

हजारों ख्वाहिशें ऐसी कि हर ख्वाहिश पे दम निकालेबहुत निकले मेरे अरमाँ, लेकिन फिर भी कम निकले
डरे क्यों मेरा कातिल क्या रहेगा उसकी गर्दन परवो खून जो चश्म-ऐ-तर से उम्र भर यूं दम-ब-दम निकले
निकलना खुल्द से आदम का सुनते आये हैं लेकिनबहुत बे-आबरू होकर तेरे कूचे से हम निकले
भ्रम खुल जाये जालीम तेरे कामत कि दराजी काअगर इस तुर्रा-ए-पुरपेच-ओ-खम का पेच-ओ-खम निकले
मगर लिखवाये कोई उसको खत तो हमसे लिखवायेहुई सुबह और घर से कान पर रखकर कलम निकले
हुई इस दौर में मनसूब मुझसे बादा-आशामीफिर आया वो जमाना जो जहाँ से जाम-ए-जम निकले
हुई जिनसे तव्वको खस्तगी की दाद पाने कीवो हमसे भी ज्यादा खस्ता-ए-तेग-ए-सितम निकले
मुहब्बत में नहीं है फ़र्क जीने और मरने काउसी को देख कर जीते हैं जिस काफिर पे दम निकले
जरा कर जोर सिने पर कि तीर-ऐ-पुरसितम निकलेजो वो निकले तो दिल निकले, जो दिल निकले तो दम निकले
खुदा के बासते पर्दा ना काबे से उठा जालिमकहीं ऐसा न हो याँ भी वही काफिर सनम निकले
कहाँ मयखाने का दरवाजा 'गालिब' और कहाँ वाइज़पर इतना जानते हैं, कल वो जाता था के हम निकले

--चश्म-ऐ-तर - wet eyesखुल्द - Paradiseकूचे - streetकामत - statureदराजी - lengthतुर्रा - ornamental tassel worn in the turbanपेच-ओ-खम - curls in the hairमनसूब - associationबादा-आशामी - having to do with drinksतव्वको - expectationखस्तगी - injuryखस्ता - broken/sick/injuredतेग - swordसितम - cruelityक़ाबे - House Of Allah In Meccaवाइज़ - preacher

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